1. सीताफल रबड़ी की शुरुआत – एक छोटे प्रयोग से बनी पहचान
जनवरी–फरवरी 2019 की बात है। हमारे बाग वाले रेस्टोरेंट में एक नवविवाहित दंपति भोजन करने आया। भोजन के बाद उन्होंने कोई नया और अलग डेज़र्ट खाने की इच्छा जताई। उस समय हमारे मेन्यू में मुख्य रूप से कुल्फी उपलब्ध थी, लेकिन दंपति कुछ नया अनुभव करना चाहता था। श्री राम कुमार माधवानी ने उपलब्ध सीताफल के गूदे (पल्प) और दो कुल्फियों को काटकर/पिघलाकर आपस में मिलाया और उसे एक प्रयोगात्मक डेज़र्ट के रूप में उस दंपति को परोसा। उन्हें यह स्वाद बहुत पसंद आया। इसी छोटे से प्रयोग ने एक नए व्यंजन की नींव रखी।
वर्षों से शिल्पग्राम में प्रदर्शित/संचालित सीताफल रबड़ी काउंटर का दृश्य।
2. 2019 से शिल्पग्राम और उदयपुर तक यात्रा
ग्राहकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद “सीताफल रबड़ी” को हमारे मेन्यू में शामिल किया गया। इसके बाद शिल्पग्राम उत्सव 2019 में इसे पहली बार बड़े स्तर पर उदयपुरवासियों और पर्यटकों तक पहुँचाया गया। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि विवाह समारोहों और पार्टियों में डेज़र्ट सेक्शन के अंतर्गत “सीताफल रबड़ी” के लिए अलग काउंटर की मांग आने लगी। पिछले कई वर्षों से हम अपने आउटलेट्स के साथ-साथ शिल्पग्राम उत्सव में भी यह व्यंजन नियमित रूप से परोसते रहे हैं।
3. स्थानीय उपज से ग्रामीण आजीविका तक
सीताफल रबड़ी की बढ़ती मांग केवल हमारे व्यवसाय की सफलता नहीं है; इसने स्थानीय स्तर पर एक छोटे खाद्य-नवाचार को आजीविका के अवसरों से जोड़ने का मार्ग भी बनाया। जब वर्षभर सीताफल पल्प की मांग बढ़ी, तो हमने अपने सप्लायर से 12 महीने पल्प उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इसी क्रम में हमें एक NGO/ग्रामीण नेटवर्क से जोड़ा गया, जिसके माध्यम से मेवाड़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों—विशेषकर कुंभलगढ़ एवं गोगुंदा क्षेत्र—में उत्पादित देसी/ऑर्गेनिक सीताफल से ग्रामीण महिलाओं द्वारा स्वच्छता के साथ तैयार किया गया पल्प उपलब्ध होने लगा। इस व्यवस्था ने खेत से ग्राहक तक एक स्थानीय मूल्य-श्रृंखला विकसित करने में मदद की।
इस पूरी यात्रा का सार एक सरल विचार में है: “लोग मिलते हैं और कारवां बनता है।” एक नवविवाहित दंपति की नई डेज़र्ट की इच्छा से शुरू हुआ प्रयोग, ग्राहकों की पसंद, स्थानीय सीताफल, ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और शिल्पग्राम के मंच से जुड़कर आज एक पहचान बन चुका है।
4. मीडिया एवं सार्वजनिक पहचान
वर्ष 2025 में दैनिक भास्कर की शिल्पग्राम उत्सव संबंधी कवरेज में “कुंभलगढ़ की सीताफल रबड़ी” का उल्लेख एवं हमारे स्टॉल की तस्वीर प्रकाशित हुई। यह कवरेज इस व्यंजन की शिल्पग्राम में बनी पहचान और आगंतुकों की रुचि का महत्वपूर्ण प्रमाण है। समाचार कवरेज की प्रति इस परियोजना प्रस्ताव के साथ संलग्न है।
दैनिक भास्कर, 2025 – शिल्पग्राम उत्सव संबंधी समाचार कवरेज की संलग्न प्रति।
5. सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव
· स्थानीय/ग्रामीण सीताफल उत्पादन को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने में सहयोग।
· ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार पल्प के लिए नियमित मांग और आय का अवसर।
· मेवाड़ के स्थानीय खाद्य ज्ञान को आधुनिक डेज़र्ट अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना।
· स्थानीय युवाओं एवं सेवा-कर्मियों के लिए मौसमी/उत्सवी रोजगार अवसर।
· उदयपुर के पर्यटन अनुभव में एक विशिष्ट स्थानीय डेज़र्ट को बढ़ावा देना।